बॉलीवुड सेलेब्स ने नए साल 2021 का स्वागत अपने-अपने अंदाज में किया। कोविड-19 महामारी के प्रतिबंधों के चलते ज्यादातर सेलेब्स घर में रहे। हालांकि, उन्होंने अपने फैमिली मेंबर्स के साथ मिलकर घर के अंदर ही नए साल की पूर्व संध्या को खास बनाया। अमिताभ बच्चन ने घर में हुए सेलिब्रेशन की एक फनी सेल्फी सोशल मीडिया पर शेयर की है, जिसमें वे टॉप पर हैप्पी न्यू ईयर बैंड वाली एक चमकदार टोपी और अजीबोगरीब चश्मा पहने नजर आ रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा है, "शांति, प्रेम और सद्भाव 2021।"
ऐश्वर्या राय ने भी सोशल मीडिया पर पार्टी की कुछ फोटो साझा की हैं, जिनमें वे ससुर अमिताभ बच्चन, सास जया बच्चन, पति अभिषेक बच्चन और बेटी आराध्या बच्चन के साथ नजर आ रही हैं।
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एक्ट्रेस सोनम कपूर ने नया साल पति आनंद आहूजा के साथ घर में रहकर ही मनाया। उन्होंने एक फोटो साझा की है, जिसमें कपल को लिप किस करते देखा जा सकता। उन्होंने कैप्शन में लिखा है, "2021, मैं अपनी जिंदगी में आपको प्यार के साथ अपनाने को तैयार हूं। यह साल प्यार, परिवार, दोस्तों, काम, यात्रा, आध्यात्म विकास और बहुत कुछ से भरा होने वाला है। मैं केवल अपनी जिंदगी के सबसे अच्छे वक्त का इंतजार कर रही हूं। हम कड़ी मेहनत करेंगे और जिंदगी पूरी तरह जिएंगे। हम बिल्कुल पीछे नहीं हटेंगे।"
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प्रियंका चोपड़ा ने पति निक जोनास के साथ न्यू ईयर सेलिब्रेशन की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की है। दोनों फिलहाल लंदन में हैं। एक्ट्रेस ने कैप्शन में लिखा, "नया साल मुबारक हो सबको! 2021 का इंतजार नहीं कर सकते, उम्मीद है कि सबकुछ बेहतर होगा।"
कॉमेडियन, एक्टर और निर्देशक असरानी का आज 80वां जन्मदिन मना रहे हैं। 1 जनवरी 1941 को पंजाब के गुरदासपुर में जन्में असरानी ने एक्टिंग की एबीसीडी पुणे के फिल्म और टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई) से सीखी। उनका पूरा नाम गोवर्धन असरानी है। चलिए जानते हैं उनकी लाइफ के कुछ फैक्ट्स...
घर से भागकर मुंबई आए थे असरानी
एक इंटरव्यू के दौरान असरानी ने बताया था कि, फिल्मों के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था। वह अक्सर स्कूल से भाग कर सिनेमा देखने जाया करते थे। यह बात उनके घरवालों को पसंद नहीं थी और उन्होंने उनके सिनेमा देखने पर पाबंदियां लगा दी। उनके पिता चाहते थे कि वह बड़े होकर सरकारी नौकरी करें। उम्र बढ़ने के साथ फिल्मों के प्रति उनका लगाव जुनून में बदल गया और एक दिन असरानी घर में बिना किसी को कुछ बताए गुरदासपुर से भाग कर मुंबई आ गए।
ऐसे मिला पुणे के फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला
मुंबई आने के बाद फिल्म लाइन में काम के लिए उन्होंने महीनों संघर्ष किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। यहां उन्हें किसी ने बताया कि फिल्मों में एंट्री के लिए उन्हें पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट से डिप्लोमा करना पड़ेगा। 1960 में पुणे में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट की स्थापना हुई। पहली बैच के लिए एक्टिंग कोर्स का विज्ञापन अखबारों में आया, इसे देख असरानी ने आवेदन किया। वे चुन लिए गए। 1964 में उन्होंने एक्टिंग का डिप्लोमा पूरा किया और फिर शुरू हुआ फिल्मों में काम ढूंढने का काम।
जब मुंबई से ले गए थे घरवाले
पुणे से डिप्लोमा कर मुंबई लौटे असरानी को फिल्मों में छोटे-मोटे रोल मिले, लेकिन उनको पहली बार पहचान मिली फिल्म 'सीमा' के एक गाने से। गुरदासपुर में जब उनके घरवालों ने इस गाने में उन्हें देखा तो वह सीधे मुंबई आए और असरानी को वापस अपने साथ ले गए। गुरदासपुर में कुछ दिन रहने के बाद वह किसी तरह घरवालों को मना कर मुंबई लौट आए।
एफटीआईआई में टीचर से एक्टिंग लाइन तक का सफर
मुंबई में बहुत दिनों तक काम ढूंढने के बाद भी उन्हें कोई रोल नहीं मिला, इसके बाद वह वापस पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट चले आये और एफटीआईआई में टीचर बन गए। इस दौरान वे अनेक फिल्म निर्माताओं के संपर्क में आए। बड़ा ब्रेक उन्हें ऋषिकेश मुखर्जी की साल 1969 में आई फिल्म 'सत्यकाम' के दौरान मिला लेकिन वह लाइम लाइट में आये 1971 में आई फिल्म 'गुड्डी' से। फिल्म में उन्हें कॉमिक रोल मिला, जिसे दर्शकों ने न सिर्फ पसंद किया बल्कि असरानी पर कॉमेडियन का ठप्पा भी लगा।
'अंग्रेजों के जमाने के जेलर' वाला डायलॉग पहचान बना
अमिताभ की कई फिल्मों में उन्होंने हीरो की बराबरी वाले रोल निभाए, जैसे अभिमान (1973) में 'चंदर' और 'चुपके चुपके' (1975) में प्रशांत कुमार श्रीवास्तव का। 'छोटी सी बात' (1975) में उनके द्वारा निभाया गया नागेश शास्त्री का किरदार भी किसी हीरो से कम नहीं है। 'शोले' (1975) में एक संवाद बोलकर असरानी ने दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचने में सफलता पाई। 'अंग्रेजों के जमाने के जेलर' वाला यह डायलॉग अब असरानी की पहचान बन चुका है।
असरानी की चर्चित फिल्में
निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी और गुलजार का असरानी के जीवन में अहम योगदान रहा। इन दो फिल्मकारों की कई फिल्मों में असरानी अलग-अलग भूमिकाओं में नजर आए। 'पिया का घर', 'मेरे अपने', 'शोर', 'सीता और गीता', 'परिचय', 'बावर्ची', 'नमक हराम', 'अचानक', 'अनहोनी' जैसी फिल्मों के जरिए असरानी दर्शकों में लोकप्रिय हो गए। इन फिल्मों में कहने को तो वे चरित्र कलाकार थे, मगर ह्यूमर अधिक होने से दर्शकों ने उन्हें कॉमेडियन समझा। 1972 में आई फिल्म 'कोशिश' और 'चैताली' में असरानी ने निगेटिव किरदार भी निभाया।