Friday, January 3, 2020

फैज की नज्म को लेकर हो रहे विवाद पर विशाल भारद्वाज ने कहा- कविता पर तमाशा करना एकदम बकवास है

बॉलीवुड डेस्क. जावेद अख्तर के बाद फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज ने फैज अहमद फैज की कविता पर जारी विवाद पर नाराजगी जाहिर की है। विशाल ने ट्वीट किया कि फैज की कविता पर इस तरह से तमाशा करना बकवास है। गौरतलब है कि कानपुर आईआईटी में फैज की कविता 'हम देखेंगे' पर जांच की जा रही है। आरोप लगाए जा रहे हैं कि यह कविता हिंदू विरोधी है।

कविता समझने के लिए उसे महसूस करना पड़ता है
विशाल ने कहा कि फैज की कविता पर इस तरह का तमाशा बकवास है। आपको कविता को समझने के लिए उसे पहले महसूस करना होगा। उन्होंने कहा कि आप लोगों में भावनात्मक बुद्धि कीकमी है जो इसे मुस्लिम समर्थक और हिंदू विरोधी बता रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक शिकायतकर्ताओं ने कविता की दो पंक्तियों "जब अर्ज ए खुदा के काबे से सब बुत उठवाए जाएंगे" और "बस नाम रहेगा अल्लाह का" पर आपत्ति जताई है।

क्या था मामला
आईआईटी कानपुर पाकिस्तान के शायर फैज अहमद 'फैज' की नज्म में हिंदू विरोध जांच करेगी। मंगलवार को संस्थान ने इसके लिए एक पैनल गठित कि है। 17 दिसंबर को जामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों पर पुलिस ने कार्रवाई के विरोध में आईआईटी कानपुर के छात्रों ने फैज की नज्म गाई थी। फैज की नज्म, ‘लाजिम है कि हम भी देखेंगे’ की आखिरी पंक्ति में हिंदू विरोधी भावनाओं के खिलाफ एक फैकल्टी ने इसकी शिकायत की थी।

जावेद अख्तर ने बताया हास्यपाद
लेखक जावेद अख्तर भी इससे पहले संस्थान की इस प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं। अख्तर के अनुसार यह नज्म फैज ने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जिया उल हक की सरकार के खिलाफ लिखी थी, यह बिल्कुल बेतुका है।

विशाल के अलावा शूजित सरकार ने भी मामले पर तंज कसते हुए कहा कि 'चूंकि ज्यादातर लोग फैज नाम के क्रांतिकारी कवि में व्यस्त हैं तो यह छोटे-बड़े सभी व्यापारों के लिए अच्छा वक्त है।'

यह है नज्म
हम देखेंगे...
लाजिम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिस का वादा है
जो लौह-ए-अज़ल में लिख्खा है

जब जुल्म-ओ-सितम के कोह-ए-गिरां
रूई की तरह उड़ जाएंगे
हम महकूमों के पांव-तले
जब धरती धड़-धड़ धड़केगी

और अहल-ए-हकम के सर-ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी
जब अर्ज-ए-खुदा के काबे से
सब बुत उठवाए जाएंगे
हम अहल-ए-सफा मरदूद-ए-हरम
मसनद पे बिठाए जाएंगे
सब ताज उछाले जाएंगे
सब तख़्त गिराए जाएंगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का
जो ग़ाएब भी है हाज़िर भी
जो मंज़र भी है नाज़िर भी
उट्ठेगा अनल-हक़ का नारा
जो मैं भी हूं और तुम भी हो
और राज करेगी ख़ल्क़-ए-ख़ुदा
जो मैं भी हूं और तुम भी हो



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Vishal Bhardwaj said on the controversy over Faiz's poem- it is utter nonsense to create ruckus over poem


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