जॉन अब्राहम की फिल्म 'परमाणु- द स्टोरी ऑफ पोखरण' की रिलीज को 2 साल पूरे हो गए। ये फिल्म 25 मई2018 को रिलीज हुई थी।इसकी कहानी भारत के परमाणु बम परीक्षणपर आधारित थी। इस मौके परफिल्म के डायरेक्टर अभिषेक शर्मा ने फिल्म से जुड़े कुछ रोचक किससे दैनिक भास्कर के साथ साझा किए। उन्होंने बताया कि इसकी शूटिंग मई महीने में 50 डिग्री तापमान के बीच रेगिस्तान में हुई थी।
अभिषेक ने कहा, 'जब हमने इस फिल्म के लिए रिसर्च किया तो पता चला कि असली परमाणु परीक्षण भी मई के महीने में पोखरण में किया गया था। इसलिए भारी परेशानियों के बावजूद हमने मई में ही इसे शूट करने का सोचा। क्रू का हर मेंबर जानता था कि इतनी भीषण गर्मी में शूटिंग करने में सभी को दिक्कतें आएंगी,लेकिन सभी ने अपने आप को इसके लिए तैयार कर लिया था।'
जब रेत के तूफान का सामना करना पड़ा था
आगे उन्होंने बताया, 'हम भीषण गर्मी के महीने में जैसलमेर के रेगिस्तान के शूटिंग कर रहे थे। तब दो-तीन बार ऐसा हुआ कि रेत का तूफान आ जाता था और हमें शूटिंग रोकना पड़ती। हमारे टेंट उखड़ जाते थे, सेट पर रखा सामान तहस-नहस हो जाता था। पर कहीं ना कहीं इस फिल्म को शूट करना इमोशनल भी था और चैलेंजिंग भी।
भीड़ ने जॉन अब्राहम को घेर लिया था
अभिषेक ने कहा 'पोखरण एक ऐसा छोटा शहर है, जहां कभी किसी तरह की कोई शूटिंग नहीं हुई थी। जब पहली बार जॉन अब्राहम के साथ टीम पोखरण फोर्ट पहुंची, तब वहां के लोगों के लिए ये एक नया ही एक्सपीरियंस था। लोग अपने घरों से बाहर निकल आए। लोगों ने फोर्ट को घेर लिया। जॉन को देखकर के लोग बेहद खुश हुए, लेकिन फिर हमें लोकल पुलिस और लोगों की मदद से भीड़ को हटाना पड़ा, ताकि हम शूटिंग कर सके।'
बम बनाने वाला किस्सासबसे यादगार हिस्सा
डायरेक्टर के मुताबिक 'शूट का सबसे यादगार हिस्सा वो था, जब न्यूक्लियर बम को बनाया जाता है। फिल्म में उसकी पूरी प्रोसेस दिखाई गई है, वह शूट करने में हमें सबसे ज्यादा मजा आया। हमने इसकी थोड़ी शूटिंग मुंबई में भी की थी। इसके लिए हमने न्यूक्लियर साइंटिस्ट से भी बात की थी, लेकिन वे भी सुरक्षा कारणों से हमें ज्यादा कुछ बता नहीं सकते थे, तो उन्होंने जितनी हेल्प की, उस हिसाब से हमने अपनी इमेजिनेशन यूज करके उस न्यूक्लियर बम को बनाया था।'
प्रमोशन के लिए मिले थे सिर्फ दो हफ्ते
फिल्म की रिलीज से जुड़ा किस्सा बताते हुए अभिषेक बोले, 'उस वक्त जॉन अब्राहम जो कि फिल्म के प्रोड्यूसर भी हैं, इस फिल्म को रिलीज करने के लिए कोर्ट में केस लड़ रहे थे और 10 मई के करीब हाईकोर्ट ने हमें फिल्म रिलीज करने की परमिशन दी थी। हमें 25 मई की डेट दी गई थी। हमारे पास मुश्किल से 2 हफ्ते थे इस फिल्म को प्रमोट करने के लिए। अमूमन एक फिल्म को प्रमोशन के लिए 4 से 5 हफ्ते दिए जाते हैं। लेकिन वो ऐसा समय था कि हम फिल्म को प्रमोट भी नहीं कर पाए। लेकिन जब इस फिल्म ने थिएटर में 50 से भी ज्यादा दिन गुजारेऔर ये एक हिट साबित हुई, तो येहम सबके लिए गर्व की बात रही।'
रेगिस्तान पर बनाया था मिलिट्री सेटअप
उन्होंने कहा, 'पोखरण इतनी सेंसिटिव जगह है कि मिलिट्री एरिया के कई किलोमीटर आसपास तक हमें शूट करने की इजाजत नहीं मिली। इसीलिए हमने हमारा मिलिट्री सेटअप रेगिस्तान में बनाया था। हमने शाफ्ट्स के जो नाम रखे थे, जो सेटअप बनाया था वह ओरिजिनल टेस्ट से काफी हद तक मिलता जुलता था। लेकिन रेतीली जमीन पर पूरा सेट बनाना अपने आप में एक चैलेंज था।'
डायना पेंटी फिल्म के लिए पहली चॉइस थी
अभिषेक के मुताबिक 'जब इस फिल्म की स्क्रिप्ट लिखी गई थी, तब डायना पेंटी का किरदार अलग से जोड़ा गया था, जो काल्पनिक था। लेकिन इस किरदार को लिखने के बाद हमने सोचा कि क्यों न इस किरदार को कोई महिला निभाए और तब डायना पेंटी ही हमारी पहली चॉइस थी।'
जॉन अब्राहम ने भी शेयर की पोस्ट
अपनी फिल्म के दो साल पूरे होने पर फिल्म के लीड एक्टर जॉन अब्राहम ने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने लिखा, ''दो साल हो चुके हैं। 'परमाणु- स्टोरी ऑफ पोखरण' भारत के अनसंग हीरोज भारतीय सेना, साइंटिस्ट्स, ब्यूरोक्रेट्स और खुफिया एजेंसियों को सलाम है, जिन्होंने सभी बाधाओं के खिलाफ अथक परिश्रम किया, ताकि वे इस बात को सुनिश्चित कर सकें कि भारत को वैश्विक परमाणु मानचित्र पर अपना स्थान मिल सके।''
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